वरिष्ठ नेता हेम सिंह भड़ाना का निधन, राजनीतिक जगत में शोक
जयपुर|राजस्थान की राजनीति में साफगोई और जमीनी जुड़ाव के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं थानागाजी (अलवर) से दो बार भाजपा विधायक रहे हेम सिंह भड़ाना का सोमवार सुबह 7 बजे निधन हो गया। वे 59 वर्ष के थे और पिछले करीब पांच महीनों से कैंसर से पीड़ित थे। उनका निधन अलवर के एक निजी अस्पताल में हुआ। भड़ाना के निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार दोपहर 12 बजे उनके पैतृक गांव किशनगढ़बास के बघेरी कलां में किया जाएगा।भाजपा के अलवर जिला मीडिया प्रभारी लक्ष्मीनारायण ने बताया कि पूर्व मंत्री के निधन के चलते पार्टी के सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं। भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
हेम सिंह भड़ाना का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की और पढ़ाई के दौरान ही राजनीति में सक्रिय हो गए। वर्ष 1991-92 में वे राजकीय कला एवं विधि महाविद्यालय, अलवर के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। यहीं से उनकी पहचान एक मुखर और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में बनने लगी।छात्र राजनीति के बाद भड़ाना ने जमीनी स्तर पर काम करते हुए स्थानीय निकायों में अपनी जगह बनाई। 10 फरवरी 2005 को वे पंचायत समिति किशनगढ़बास के प्रधान बने। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण विकास और जनसमस्याओं को लेकर सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ बनी।
दो बार विधायक, फिर मंत्री
हेम सिंह भड़ाना वर्ष 2008 में पहली बार भाजपा के टिकट पर थानागाजी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए और 2008 से 2013 तक तेरहवीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे। इस कार्यकाल में वे पुस्तकालय समिति, पिछड़े वर्ग कल्याण समिति और राजस्थान विधानसभा की अन्य समितियों के सदस्य रहे।2013 में वे दूसरी बार विधायक बने और वसुंधरा राजे सरकार में उन्हें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। वर्ष 2014 में उन्हें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। इसके बाद उपभोक्ता मामलों के मंत्री का जिम्मा भी उन्हें दिया गया।वर्ष 2016 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के दौरान हेम सिंह भड़ाना को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उन्हें मुद्रण एवं लेखन सामग्री, स्टेट मोटर गैराज और संपदा विभाग का मंत्री बनाया गया। साथ ही उनके पास सामान्य प्रशासन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहा। मंत्री रहते हुए उन्होंने विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष जोर दिया।
क्षेत्र से खास लगाव
हेम सिंह भड़ाना की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही, जो पद और सत्ता से ऊपर क्षेत्र और लोगों को प्राथमिकता देते थे। वे अलवर शहर के वीर सावरकर नगर में रहते थे, लेकिन इसके बावजूद लगभग हर दिन थानागाजी क्षेत्र में पहुंचकर आमजन से मुलाकात करते थे। क्षेत्र की छोटी-बड़ी समस्याओं को सुनना और मौके पर ही समाधान का प्रयास करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था।
बीमारी में भी सक्रिय
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद भड़ाना पूरी तरह सक्रिय रहे। बीमारी का पता चलने के बाद भी वे लोगों से मिलने और कार्यकर्ताओं से संवाद बनाए रखते थे। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने थानागाजी से चुनाव लड़ा, जहां कांग्रेस प्रत्याशी कांति प्रसाद से उन्हें बेहद कम मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
परिवार और निजी जीवन
हेम सिंह भड़ाना अपने पीछे दो बेटे छोड़ गए हैं। उनके बड़े बेटे धीरेंद्र भड़ाना व्यवसाय से जुड़े हुए हैं, जबकि छोटे बेटे सुरेंद्र भड़ाना राजनीति में सक्रिय हैं और क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी निभा रहे हैं।
शोक की लहर
पूर्व मंत्री हेम सिंह भड़ाना के निधन को राजस्थान की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और जनता से सीधा जुड़ाव उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देता था। राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है।

बेटी की मौत का सदमा, पिता ने भी तोड़ा दम; 262 करोड़ रुपये का मुआवजा तय
केंद्र और सीएम के बीच मतभेद? विपक्ष ने साधा निशाना
Trade Deal: डेयरी और पोल्ट्री के दरवाजे नहीं खोले गए, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बोले कृषि मंत्री चौहान
तबादला नीति पर गरमाया सदन, दिलावर-जूली आमने-सामने
ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें बढ़ीं, 29 पर चार विकेट गंवाए, इंग्लिस-ग्रीन और डेविड-हेड आउट