इजराइल के साथ हो रही जंग के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने दी चेतावनी
तेहरान । ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमलों के लिए मिसाइलें और अन्य सैन्य उपकरण तैयार कर लिए हैं, अगर अमेरिका इजरायल के साथ युद्ध में शामिल होता है। यह जानकारी उन अमेरिकी अधिकारियों ने दी है जिन्होंने खुफिया रिपोर्टों की समीक्षा की है। रिपोट्र्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब तीन दर्जन ईंधन भरने वाले विमान यूरोप भेजे हैं, जो अमेरिकी सैन्य अड्डों की सुरक्षा में लगे फाइटर जेट्स की मदद कर सकते हैं या फिर ईरान के परमाणु ठिकानों पर संभावित हमलों के लिए लंबी दूरी तय करने वाले बॉम्बर जेट्स की मदद कर सकते हैं। अमेरिका ने स्कॉटलैंड-इटली में सैन्य विमानों की तैनाती बढ़ा दी है।
अमेरिकी अधिकारियों के बीच युद्ध के और अधिक भडक़ने की आशंका बढ़ रही है, क्योंकि इजरायल व्हाइट हाउस पर दबाव बना रहा है कि वह ईरान के खिलाफ उसके अभियान में शामिल हो। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अगर अमेरिका ने ईरान के ‘फोर्डो’ परमाणु ठिकाने पर हमला किया तो ईरान समर्थित हूती विद्रोही फिर से लाल सागर में जहाजों पर हमले शुरू कर देंगे। इसके अलावा, इराक और सीरिया में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया समूह भी अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले कर सकते हैं।
अमेरिका के 40,000 से ज्यादा सैनिक तैनात
कुछ अधिकारियों का यह भी कहना है कि अगर युद्ध शुरू हुआ तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है, ताकि अमेरिकी युद्धपोत फारस की खाड़ी में फंस जाएं। मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका ने यूएई, जॉर्डन और सऊदी अरब में अपने सैन्य अड्डों पर तैनात सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 40,000 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं।
ईरान के निशाने पर अमेरिकी अड्डे
दो ईरानी अधिकारियों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि अगर अमेरिका इजरायल के युद्ध में शामिल होता है तो ईरान सबसे पहले इराक में स्थित अमेरिकी अड्डों पर हमला करेगा। इसके अलावा, किसी भी अरब देश में मौजूद अमेरिकी अड्डा अगर हमले में भाग लेता है तो उसे भी निशाना बनाया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि हमारे दुश्मनों को यह समझना चाहिए कि वे सैन्य हमलों से कोई समाधान नहीं निकाल सकते और न ही ईरानी जनता पर अपनी शर्तें थोप सकते हैं।
पहली बार फतह-1 का इस्तेमाल
ईरान की सैन्य शाखा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स ने कहा कि बुधवार सुबह इजराइल पर फतह मिसाइल से हमला किया गया है। यह पहली बार है जब इस जंग में फतह-1 का इस्तेमाल किया गया है। फतह मिसाइल हाइपरसोनिक है, यानी यह आवाज की गति से पांच गुना तेज उड़ती है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स ने कहा कि फतह मिसाइलों ने इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम को भेद दिया और बार-बार उनके सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि इससे इजराइल को कितना नुकसान पहुंचा है, इसकी कोई सूचना नहीं है। इस बीच वॉशिंगटन स्थित एक ह्यूमनराइट्स ग्रुप ने दावा किया है कि ईरान में मौत का आंकड़ा अब 600 हो चुका है। जबकि 1,326 लोग घायल हुए हैं। ईरान की सरकार ने अब तक मौतों की पूरी जानकारी साझा नहीं की है। आखिरी बार ईरान ने सोमवार को हताहतों की जानकारी शेयर की थी। सरकार के मुताबिक इस लड़ाई 224 ईरानी मारे गए हैं, जबकि 1,277 घायल हुए हैं।
सरेंडर नहीं करेंगे खामेनेई
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने बुधवार को नागरिकों को अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका सुन ले, हम सरेंडर नहीं करेंगे। खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इजराइल के खिलाफ जंग में अमेरिकी सेना ने दखल दिया, तो अंजाम बुरा होगा। इससे पहले खामेनेई ने मंगलवार देर रात इजराइल के खिलाफ जंग का ऐलान किया था। उन्होंने एक्स पर लिखा- जंग शुरू होती है। हम आतंकी इजराइल को कड़ा जवाब देंगे। उन पर कोई दया नहीं दिखाएंगे। इस ऐलान के बाद ईरान ने इजराइल पर 25 मिसाइलें दागीं। ईरान ने कहा है कि अगर उसे यह पता चलता है कि अमेरिका उसके क्षेत्र पर हमलों में सीधे तौर पर शामिल है, तो वह अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू कर देगा। यह बयान जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने बुधवार को दिया। अली बहरेनी ने कहा अगर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अमेरिका ईरान पर हमलों में सीधे तौर पर शामिल है, तो हम अमेरिका को जवाब देना शुरू कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल के हमलों पर ईरान की प्रतिक्रिया मजबूत और बिना किसी रुकावट के होगी, लेकिन संयमित और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार दी जाएगी।

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